1. बजट 2025 का ऐतिहासिक फैसला
केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट 2025 में एक बड़ा उलट-फेर किया है — राज्यों को 50 वर्षों की अवधि वाला ब्याज-मुक्त ऋण (Interest Free Loan to States) उपलब्ध कराया जाएगा। यह ऋण विशेष तौर पर उनकी कैपिटल एक्सपेंडिचर (infrastructure development) योजनाओं को सब्सिडी के साथ आगे बढ़ाने के लिए होगा। इससे राज्यों को बड़े पैमाने पर अवसंरचना में निवेश करने का मौका मिलेगा, बिना किसी वित्तीय बोझ के।
2. राज्यों को मिलेगा राहत — खर्च बढ़ाने की सुविधा
इस लंबे समयबद्ध ब्याज-मुक्त ऋण से राज्यों को बड़ी परियोजनाओं (जैसे_{health, education, transportation} infrastructure) पर खर्च बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे आर्थिक विकास की गति तेज होगा, विशेष रूप से उन राज्यों में जहां वित्तीय सीमाएं थीं। यह रणनीतिक पहल केवल वित्तीय राहत नहीं, बल्कि विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।
3. दिल्ली में ₹821 करोड़ की मंजूरी — विकास का आधार
दिल्ली को Special Assistance to States/UTs for Capital Investment (SASCI) योजना के तहत ₹821 करोड़ का ब्याज-मुक्त ऋण दिया गया है। इसमें से ₹716 करोड़ 33 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए और ₹105 करोड़ MRTS Phase-IV कॉरिडोर के लिए आवंटित किए गए हैं। इस ऋण से तमाम योजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जिससे राजधानी का विकास नया रूप ले रहा है।
4. सरकार का उद्देश्य — स्थिर और सतत विकास
ब्याज-मुक्त ऋण योजना से सरकार का लक्ष्य अर्थव्यवस्था में स्थिरता और सततता लाना है। इससे राज्यों को वित्तीय दबाव में बगैर भारी बोझ के निवेश करने का अवसर मिलता है। बड़ी परियोजनाएं शुरू होंगी, रोजगार के नए अवसर बनेंगे, और देश में देशी और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा।
5. लाभार्थियों की उम्मीदें
राज्य सरकारें इस वित्तीय सहारे से शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और आवासन जैसी आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बना सकेंगी। इससे नागरिकों को रोज़मर्रा की सुविधाओं में सुधार महसूस होगा और विकास की लहर आम जनता तक पहुंचेगी।



